नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online | Nam se muhar nikalna online: दोस्तों जब एक लड़का और लड़की अपनी शादी की उम्र पर पहुंचते हैं और जब उनका विवाह संबंध बनाया जाता है तो शुभ मुहूर्त देखा जाता है विवाह करने से पहले कई पहलुओं पर विचार किया जाता है प्रमुख रूप से नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online प्राथमिकता होती हैं अक्सर लोगों का विवाह पहले नाम के आधार पर ही तय किया जाता है.

नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online आज के समय की एक नई व्यवस्था है जबकि आदिकाल से किसी भी लड़का लड़की के वैवाहिक संबंधों में शुभ मुहूर्त के लिए विवाह लग्न पत्रिका देखी जाती थी और आज भी देखी जाती है उस आधार पर लड़का और लड़की के गुणों का मिलान किया जाता है तब जाकर विवाह के लिए शुभ मुहूर्त तय किया जाता है.
हालांकि बहुत से लोगों का वैवाहिक संबंध जैसे ही तय होता है वैसे ही उनके गुण मिलान किया जाता और निश्चित कर दिया जाता है लेकिन ऐसे बहुत से भी लोग हैं जिन के गुणों का मिलान नहीं हो पाता है क्योंकि वैवाहिक जीवन बहुत दुश्वारियां पूर्ण होता है। कभी-कभी विवाहित संबंध बनाने के बाद शुभ मुहूर्त के लिए उचित गुण लगन नहीं मिलते हैं जिससे विवाह में बाधाएं आती हैं.
- 1. ब्राह्मणों द्वारा नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online | Brahmanon dwara Naam Se Vivah muhurt nikalna online
- 2. घर बैठे नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online | Ghar Baithe Naam Se Vivah muhurat nikalna online
- 2.1. 1. दोषों को देखना
- 2.2. 2. गुरु बल और सूर्य बल देखना
- 2.3. 2. कन्या के लिए गुरुबल
- 2.4. 3. वर के लिए सूर्यबल
- 2.5. 4. वर वधु दोनों के लिए चंद्रबल
- 2.6. 5. अन्धादि लग्न देखना
- 3. विवाह मुहूर्त में लग्न का महत्व | Vivah muhurt Mein Lagan ka mahatva
- 4. विवाह लग्न देखते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- 5. FAQ : नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online
- 5.1. किन नक्षत्रों में विवाह का मुहूर्त शुभ होता है ?
- 5.2. विवाह के लिए कौन से महीने शुभ होते हैं?
- 6. निष्कर्ष
ब्राह्मणों द्वारा नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online | Brahmanon dwara Naam Se Vivah muhurt nikalna online
आज के समय में विवाह की प्रारूप बदल गए हैं अक्सर लड़का और लड़की प्रेम विवाह कर बैठते हैं लेकिन बाद में घरवालों की रजामंदी से वैवाहिक संबंध के लिए तैयार हो जाने के बाद उनके विवाह का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है और उसके बाद उस प्रेम विवाह को सामाजिक मान्यताओं के अनुसार वैवाहिक बंधनों में बांध दिया जाता है.
हालांकि सामान्य रूप से वर और कन्या पक्ष के पारिवारिक लोग विवाह संबंधित तय करते हैं तो किसी योग्य ब्राह्मण के द्वारा वैवाहिक शुभ मुहूर्त निकाला जाता है इस दौरान ब्राह्मण दोनों के नाम से विवाह मुहूर्त निकालता है लेकिन आजकल लोग अपने नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online देख लेते हैं.
जब हम किसी ब्राह्मण द्वारा वैवाहिक संबंधों के शुभ मुहूर्त निकालते हैं तो वर और वधू दोनों पक्ष की कुंडलियों का मिलान करते हैं उनके गुणों को मिलाया जाता है सामान्य रूप से वैवाहिक संबंध बनाने के लिए 18 से 32 के बीच गुण होते हैं अगर इससे नीचे हैं तो विवाह नहीं बनता हुआ माना जाता है.
यदि न्यूनतम गुण 18 होते हैं और अधिकतम 32 होते हैं तथा इनके बीच में किसी के गुण मिलान करते हैं तो शादी सफल मानी जाती है क्योंकि कुंडली में सातवां घर विवाह से संबंधित होता है.
वर वधु के विवाह में कुंडली में गुणों के मिलान के साथ-साथ जन्म राशि के आधार पर भी विवाह मुहूर्त बनता है तथा इस दौरान तिथि वार नक्षत्र और समय को भी निकाला जाता है इस प्रकार ग्रहों की दशा और नक्षत्रों का विश्लेषण करके वैवाहिक शुभ मुहूर्त निकाले जाते हैं और विवाह संपन्न कराया जाता है.
वर और वधू दोनों के नाम के पहले अक्षर से कुंडली का मिलान किया जाता है या फिर जन्म राशि के आधार पर कुंडली का मिलान किया जाता है जन्म के समय चंद्र नक्षत्र के आधार पर राशि निर्धारित की जाती है अगर जन्म राशि के आधार पर गुणों का मिलान सही होता है तो विवाह मुहूर्त सही माना जाता है.
घर बैठे नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online | Ghar Baithe Naam Se Vivah muhurat nikalna online

दोस्तों आज के समय में घर बैठे नाम से विवाह मुहूर्त निकालना ऑनलाइन हो चुका है घर बैठे नाम से विवाह मुहूर्त निकालने के लिए कुछ आसान तरीके मिल जाते हैं आइए हम आपको नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online बताते हैं.
1. दोषों को देखना
ज्योतिष में विवाह से संबंधित 10 प्रकार के दोष बताए गए हैं जिसमें से लग्न पत्रिका के सामने दोषों के लिए उतनी ही रेखाएं टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं जितनी खींची गई होती है अर्थात जितनी टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं खींची है इतने दोष होते हैं। इसी प्रकार से अगर दोस्त नहीं होते हैं तो उतनी ही सीधी रेखाएं खींची होती.
सबसे अच्छे मुहूर्त के रूप में 10 रेखाएं मानी जाती हैं और मध्यम मुहूर्त के लिए 7 से 8 रेखाएं तथा 5 रेखाओं से कम होने पर दोस्त ही दोस्त माने जाते हैं अर्थात यदि रेखाओं की संख्या 5 से कम हो तो दीवाने कई दोष माने जाते हैं और विवाह करना उचित नहीं माना जाता है.
2. गुरु बल और सूर्य बल देखना
घर बैठे शुभ विवाह के मुहूर्त निकालने के लिए कन्या के गुरुबल और वर के सूर्य बल पर विचार किया जाता है इसके साथ साथ दोनों के चंद्र बल पर भी विचार करना जरूरी होता है। लग्न पत्रिका में शुभ विवाह के मुहूर्त लिखे होते हैं जिसमें शुभ मुहूर्त के लिए खड़ी रेखाएं बनी होती हैं और अशुभ के लिए टेढ़ी रेखाएं बनी होते हैं.
2. कन्या के लिए गुरुबल
किसी भी लड़का और लड़की के वैवाहिक संबंधों में नाम से विवाह मुहूर्त निकालना चाहते हैं तो कन्या के गुरू बल का भी ध्यान दिया जाता है ग्लोबल के रूप में यदि गुरु बृहस्पति राशि में नवम भाव पंचम एकादश द्वितीय और सप्तम में है तो इसे शुभ माना जाता है अगर गुरु बृहस्पति दशम तृतीय षष्ठ और प्रथम भाव में होते हैं तो दान देना शुभ माना जाता है लेकिन चतुर्थ अष्टम द्वादश भाव में विवाह का योग अशुभ माना जाता है.
3. वर के लिए सूर्यबल
विवाह लग्न पत्रिका के अनुसार अगर सूर्य राशि में तृतीय शस्त्र दशम एकादश भाव में है तो विवाह बंधन शुभ मुहूर्त शुभ होता है वही सूर्य के प्रथम धोती पंचम और सप्तम नवम भाव में होने पर दान शुभ माना जाता है तथा चतुर्थ अष्टम द्वादश में विवाह मुहूर्त अशुभ माना जाता है.
4. वर वधु दोनों के लिए चंद्रबल
कन्या के लिए गुरूबल और वर्ग के लिए सूर्य बल देखने के बाद दोनों के लिए चंद्रबल कुंडली में देखा जाता है अगर चंद्रमा वर और कन्या दोनों के तीसरे छठे सातवें दसवें और ग्यारहवें भाव में है तो विवाह शुभ होगा और चौथे आठवें बारहवें भाव में अशुभ माना जाएगा वही नवे भाव में दान देना शुभ माना जाता है.
5. अन्धादि लग्न देखना
कुंडली में राशि में कभी कभी अन्धादि लग्न भी होता है अन्धादि लग्न के रूप में तुला और वृश्चिक दिन में रात तुला और मकर रात्रि में बधिर माने जाते हैं अर्थात इस दौरान लग्न अंधक होता है इसी तरह से सिंह मेष वृष दिन में और कन्या मिथुन कर्क रात्रि में अंधक होते हैं.
कुंभ दिन में और मीन रात्रि में पंगु माने जाते हैं धनु तुला वृश्चिक अपराहन में बधिर होते हैं मिथुन कर्क व कन्या लग्न रात्रि में अंधे होते हैं सिंह में सब रस दिन में अंधे होते हैं मकर कुंभ मीन सुबह और शाम में पंगु माने जाते हैं.
इन चीजों का विचार करने के बाद देखा जाता है कि अगर वर वधु का विवाह बधिर लग्न में होता है तो दोनों लोग जीवन में दरिद्रता से जीवन यापन करते हैं वहीं दूसरी ओर दिवान्ध में कन्या का विवाह होता है तो विधवा हो जाती हैं.
अगर रात्रान्ध लग्न में विवाह होता है तो संतान की मृत्यु हो जाती है पंगु लग्न में विवाह करने से धन का नुकसान होता है इसीलिए विवाह शुभ लग्न में करने के लिए तुला मिथुन कन्या वृष और धन बेहतर माने जाते हैं जबकि अन्य सभी प्रकार के लग्न मध्यम प्रकार के होते हैं.
विवाह मुहूर्त में लग्न का महत्व | Vivah muhurt Mein Lagan ka mahatva
शादी विवाह जैसे संबंधों में मुख्य रूप से शुभ मुहूर्त और लग्न अर्थात फेरे लेने का समय माना जाता है और फेरे लेने का समय शादी की तारीख होने के बाद तय की जाती है विवाह संस्कार के दौरान तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग व नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है. बिना लग्न के विवाह सही नहीं माना जाता है.
विवाह लग्न देखते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- जब भी हम लड़का और लड़की के विवाह तय करते हैं तो लग्न पत्रिका पर विचार करते हैं गुणों पर विचार करते हैं ग्रह और नक्षत्रों पर विचार करते हैं परंतु कुछ चीजें हम फिर भी नहीं ध्यान देते हैं इसलिए विवाह लग्न मुहूर्त बनाते समय कुछ बातें ध्यान देने जरूरी है जो इस प्रकार हैं.
- लग्न भाव में किसी नीच ग्रह के स्थित ना हो तथा विवाह लग्न से तृतीय भाव में शुक्र की उपस्थिति ना हो तो विवाह शुभ माना जाता है.
- विवाह लग्न में चंद्रमा कमजोर नहीं होना चाहिए और चंद्र शुक्रवार मंगल अष्टम भाव में नहीं होनी चाहिए.
- विवाह लगने से सप्तम भाव में कोई ग्रह न हो तथा विवाह लगना द्वितीय व द्वादश भाव में कोई पापी ग्रह नहीं होना चाहिए.
- वर और वधू के लग्न राशि से अष्टम राशि का लग्न शुभ विवाह मुहूर्त होता है इसे ध्यान देना चाहिए.
- जन्म कुंडली में विवाह लग्न में अष्टम भाव का स्वामी नहीं होना चाहिए.
- विवाह लग्न से द्वादश भाव में शनि और दशम भाव में शनि दोनों जगह पर नहीं होना चाहिए.
FAQ : नाम से विवाह मुहूर्त निकालना online
किन नक्षत्रों में विवाह का मुहूर्त शुभ होता है ?
हिंदू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार शुभ विवाह मुहूर्त के रूप में मूल, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, हस्त, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा आषाढ़, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति, मघा और रोहिणी आदि नक्षत्र को विवाह आदि के लिए शुभ माने गये है ।
विवाह के लिए कौन से महीने शुभ होते हैं?
ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन, वैशाख, मार्गशीर्ष और आषाढ़ माह में ही विवाह करना शुभ माना जाता हैं ।
निष्कर्ष
भारतीय हिंदू समाज में 16 संस्कारों में से विवाह को एक संस्कार माना गया है इसीलिए जब भी विवाह वरकन्या का होता है तो महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखनी होती है जिसमें नाम से विवाह मुहूर्त निकालना बेहद महत्वपूर्ण तथ्य होता है इसके साथ साथ राशि ग्रह नक्षत्र पर भी विचार करना जरूरी होता है और कुंडली के विभिन्न भाव में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति को भी देखा जाता है.






