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Mangal dosh ke upay in hindi : हेलो दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि मंगल दोष कैसे पता करें और मंगल दोष क्या होता है इसके विषय में आज हम आपको संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे दोस्तों मंगल दोष एक ऐसी चीज है जिसके होने से बहुत से नुकसान हो जाते हैं वैसे नुकसान ही नहीं कुछ फायदे भी होते हैं दोस्तों अक्सर आपने अपने घर या आस पड़ोस में लोगों को यह कहते हुए जरूर सुना होगा कि यह व्यक्ति मांगलिक है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस किसी व्यक्ति की कुंडलीमें मंगल भारी होते हैं वे मांगलिक या उनके ऊपर मंगल दोष रहता है। जन्म कुंडली के अध्ययन से कुंडली के प्रथम भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव तथा द्वादश भाव में से किसी भी भाव में मंगल का होना जन्मपत्रिका को मांगलिक बना देता है।
मांगलिक कुंडलियों में यदि मंगल प्रथम भाव में वृषभ या तुला राशिके हो तो ये जातक के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं ऐसा जातक क्रोधी, झगड़ालू और जिद्दी होता है अतः इस भाव से संबंधित मांगलिक दोष का विशेष ध्यान रखें।
किसी भी लड़के लड़की की कुंडली में मांगलिक दोष हो तो विवाह में परेशानी होती है इसके पश्चात जीवन साथी के साथ मनमुटाव रहता है और अगर किसी भी कुंडली में मंगल दोष बहुत ही प्रभावी और बली हो जाए तो ऐसे व्यक्ति मांगलिक हो जाते हैं मांगलिक लड़के की शादी हमेशा मांगलिक लड़की से ही करनी चाहिए ऐसा न करने पर विवाह होने के बाद दांपत्य जीवन में बहुत सारी समस्याएं होती हैं।
मंगलिक कितने प्रकार के होते हैं ?
कुंडली में जब प्रथम द्वितीय सप्तमी अष्टम अथवा दसवीं भाव में मंगल होता है इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है की जिसकी कुंडली में यह दोष है तो उन्हें मांगलिक जीवनसाथी की ही तलाश करनी चाहिए।
यह माना जाता है कि 28 वर्ष की उम्र के बाद मंगल दोष स्वत ही समाप्त हो जाता है ज्योतिष के अनुसार यदि केंद्र में चंद्र है तो मंगल दोष नहीं माना जाता है।
मंगल दोष के लक्षण और उपाय | mangal dosh ke lakshan aur upay
अब आगे के लेख में हम मंगल दोष के लक्षण और उपाय के बारे में विस्तार से जानेंगे जिस से हम मंगल दोष को पहचान सके और इन उपायों को अपना कर इस से मुक्त हो सके .
मंगल दोष के लक्षण क्या है ? | mangal dosh ke lakshan
जब लग्न में यह स्थिति होती है तो जातक का स्वभाव अत्यधिक तेज गुस्साए लो और अहंकारी हो जाता है।
चतुर्थ में मंगल जीवन में सुखों में कमी करता है और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां आती है ।
सप्तमी भाव में मंगल होने से वैवाहिक संबंधों में कठिनाइयां आती है।
मांगलिक लड़के की पहचान कैसे करें ? | Mangal dosh ki pehchan
मांगलिक लड़के की पहचान कैसे करें मांगलिक लड़का बहुत ही बहादुर और उत्साहित होता है उसके भीतर आक्रमक का कूट कूट कर भरी होती है और वह गुस्सा करने वाला भी होता है
आक्रमक और गुस्सैल ज्योतिष शास्त्र में मंगल सेनापति का स्थान दिया गया है
मांगलिक दोष में धैर्य की कमी हो जाती है
ऐसा कहा जाता है कि मांगलिक दोष में जल्दबाजी में निर्णय लिया जाता है
मांगलिक दोष में घरेलू जीवन में दरार पड़ने लगती है
मांगलिक दोष में लोग दूसरे की बात नहीं सुनते हैं
मांगलिक दोष में लोग सीधी बात नहीं करते हैं
मांगलिक दोष से मुक्त होने के विशेष उपाय क्या है ? | Mangal dosh ke upay
भगवान की शिवलिंग पर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें।
लाल मसूर का मंगलवार को दान करें।
सबसे बड़ा उपाय अहंकार और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण रखना है
भगवान शिव और शक्ति की पूरी श्रद्धा से पूजा करें।
घर में आने वाले मेहमानों को मिठाई खिलाने से मंगलदोषका असर कम रहता है।
चांदी की चौकोर डिब्बी में शहद भरकर रखने से भी मंगल का असर कम हो जाता है।
कुंडली में मंगल समस्या दे रहा हो तो शहद न खाएं, बल्कि हर मंगलवार शिवलिंग पर अर्पित करें।
तो देखा आप लोगों ने मंगल दोष होने के कितने फायदे या नुकसान है जिनके बारे में अक्सर लोगों को जानकारी ही नहीं होती है और दोस्तों अगर आप भी मांगलिक होने के नुकसान से जूझ रहे हैं तो मांगलिक दोष को प्राप्त करने के उपाय जरूर अपनाएं
श्री हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन श्रद्धा से करें।
मंगल दोष के फायदे
आपने अक्सर अपने परिवार में या अपने आस-पास किसी के मांगलिक होने के बारे में सुना होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष भारी होता है वह व्यक्ति मांगलिक होता है या उस पर मंगल दोष होता है। जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में मंगल की उपस्थिति जन्म कुंडली को मांगलिक बनाती है, जिसे बहुत बुरा माना जाता है। तो चलिए जानते हैं कि मंगल दोष के फायदे क्या है
इस दशा में व्यक्ति ज्यादा सुन्दर नहीं होता, लेकिन उसके चेहरे पर लालिमा होती है।
यहाँ मंगल, माता व जीवनसाथी के साथ ख़राब व्यवहार करने पर विवश करता है।
जन्म पत्रिका में ऐसी अनेक स्थितियां हैं, जो मंगल दोष के प्रभाव को कर करने अथवा उसका परिहार करने में सक्षम हैं। इनमें से कुछ योगों के बारे में हम यहां उल्लेख कर रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि मंगल दोष के नुकसान क्या है
यदि मंगल दोष आम भाषा में समझें तो कहा जाता है कि मंगल दोष जिसकी कुंडली में होता है उस इंसान का वैवाहिक जीवन किसी ना किसी समस्याओं से गुज़रता रहता है.
यदि किसी वर-कन्या की जन्म पत्रिका में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि, राहु, केतु आदि स्थित हों तो ‘मंगल दोष’ का परिहार हो जाता है।
यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगल दोष निष्प्रभावकारी होता है।
यदि मांगलिक दोष वाले लड़के अथवा लड़की का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले से ही होना आवश्यक है।
यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चतुर्थ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो, तब भी मंगल दोष निष्प्रभावकारी हो जाता है।
यदि मंगल अष्टम भाव में नीच राशि कर्क में स्थित हो अथवा धन राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावकारी हो जाता है।
तो अब आप लोगों को पता चल गया होगा कि मंगल दोष कैसे पता करें तो आप लोग भी इसके नुकसान और फायदे जान सकते है.
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