Tulsi vivah puja vidhi | तुलसी विवाह पूजा विधि : हिंदू धर्म में तुलसी विवाह हर साल कार्तिक महीने की देवउठनी एकादशी पर मनाई जाती है, देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने की लंबी निंद्रा से जागते हैं, जिसके पश्चात सभी प्रकार के शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं.

तुलसी विवाह में माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के साथ कराया जाता है, मान्यता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाता है. उसे कन्यादान के बराबर का पुण्य मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है tulsi vivah puja vidhi ? और पूजा का शुभ समय इत्यादि के बारे में.
- 1. तुलसी विवाह पूजा सामग्री | Tulsi vivah puja samagri
- 2. तुलसी विवाह पूजा विधि | Tulsi vivah puja vidhi
- 3. तुलसी विवाह के नियम | Tulsi vivah ke niyam
- 4. तुलसी विवाह के फायदे | Tulsi vivah ke fayde
- 5. तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने का शुभ मुहूर्त | Tulsi vivah anusthan karwane ka shubh muhurat
- 6. FAQ: Tulsi vivah puja vidhi
- 7. निष्कर्ष
तुलसी विवाह पूजा सामग्री | Tulsi vivah puja samagri
तुलसी विवाह पूजा अनुष्ठान करने के लिए सबसे पहले नीचे बताई जा रही, निम्न सामग्री की व्यवस्था करें.

- गन्ना
- मंडप की सारी सामग्री
- सुहाग के लिए पूरा श्रंगार (खास करके लाल चुनरी)
- घी
- दीपक
- सिंदूर
- चंदन
- नैवध
- पुष्प
- मूली
- अवला
- शकरकंद
- सिंघाड़ा
- अमरूद
- अन्य ऋतु फल
- तुलसी का पौधा और शालिग्राम भगवान की प्रतिमा
तुलसी विवाह पूजा विधि | Tulsi vivah puja vidhi
- तुलसी विवाह पूजा की सारी सामग्री इकट्ठा होने के पश्चात सबसे पहले घर के आंगन या छत पर एक चौकी बनाएं.
- चौकी की व्यवस्था हो जाने के पश्चात चौकी पर अष्टदल कमल का चिन्ह बनाकर, उस पर कलश स्थापना करें.
- कलश स्थापना करने के लिए सबसे पहले कलश पर स्वास्तिक चिन्ह बनाए, उसके बाद कलश के अन्दर साफ जल भरकर उसे चौकी पर स्थापित कर दें.
- कलश को चौकी पर स्थापित करने के बाद कलश के ऊपर आम के पांच पत्ते रखकर उसके ऊपर पानी वाला नारियल स्थापित करें.
- चौकी पर कलश स्थापना के बाद, चौकी के चारों तरफ गन्ने का मंडप सजाएं.
- मंडप सजाने के बाद तुलसी के गमले पर गेरू लगाए, उसके बाद तुलसी के पौधे पर लाल चुनरी डालकर, श्रृंगार का सारा सामान अर्पित करें .
- तुलसी का श्रृंगार करने के पश्चात, शालिग्राम जी को पीले वस्त्र पहनाकर, दोनों को एक साथ मंडप की चौकी पर स्थापित कर दे.
- तुलसी और शालिग्राम भगवान की स्थापना करने के बाद, सबसे पहले भगवान गणेश और कलश की विधिवत पूजा अर्चना करें.
- भगवान गणेश और कलश की विधिवत पूजा के पश्चात, तुलसी माता को रोली का और शालिग्राम को चंदन का टीका लगाकर , उनके ऊपर आम के पत्ते से गंगाजल से छिड़काव करें.
- इतनी रस्में करने के बाद, अब आप तुलसी मंगाष्टक का पाठ करें , जब मंगाष्टक का पाठ पूरा हों जाएं, तो शालिग्राम मूर्ति सहित सिंहासन को अपने हाथ में लेकर तुलसी के पौधे के साथ सात परिक्रमा कराए.
- विवाह के सात फेरे पूरा हो जाने के पश्चात माता तुलसी और शालिग्राम भगवान की कपूर के दीपक से आरती करके इनके समक्ष भोग के रूप में फल अर्पित करें.
- उसके बाद तुलसी विवाह अनुष्ठान में शामिल लोगों को प्रसाद अर्पित करने के पश्चात सभी लोग आपस में बैठकर विवाह समारोह में गाए जाने वाले गीत गाएं.
इस विधि के द्वारा तुलसी विवाह संपन्न करना चाहिए.
तुलसी विवाह के नियम | Tulsi vivah ke niyam
तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने के लिए विवाह से संबंधित सभी प्रकार की रस्मे निभाने के साथ-साथ नीचे बताए जा रहे, निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है .

- तुलसी विवाह का मंडप घर के आंगन या फिर छत पर बनाएं.
- तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने वाले व्यक्ति को प्रातः काल स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए.
- जो लोग तुलसी कन्यादान करने में शामिल हो उन लोगों को इस दिन उपवास रखना चाहिए.
- मंडप के नीचे तुलसी माता को भगवान शालिग्राम के दाएं तरफ बैठाए .
- तुलसी विवाह में तुलसी माता को रोली का टीका लगाएं और शालिग्राम भगवान को चंदन का टीका लगाएं.
- तुलसी विवाह पूजा हमेशा संध्याकाल में की जाती है.
तुलसी विवाह के फायदे | Tulsi vivah ke fayde
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, ऐसे में आइए जानते हैं कि तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने से क्या-क्या लाभ प्राप्त होते हैं ?
- जो भी व्यक्ति तुलसी विवाह का अनुष्ठान करवाता है, तो उस व्यक्ति को कन्या दान के पुण्य की प्राप्ति होती है.
- तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने से विवाह से संबंधित समस्याएं दूर होती हैं.
- तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने से माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है .
- तुलसी विवाह करवाने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि आती है.
- तुलसी विवाह करवाने से दुर्भाग्य दूर होता है.
- तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने का शुभ मुहूर्त | Tulsi vivah anusthan karwane ka shubh muhurat
तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शाम 7:50 से 9:20 तक माना जाता हैं.
FAQ: Tulsi vivah puja vidhi
[faq-schema id=”65985″]निष्कर्ष
दोस्तों जैसा कि आपका प्रशन था कि tulsi vivah puja vidhi क्या है ? तो इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमने ऊपर के लेख में तुलसी विवाह पूजा की संपूर्ण विधि बताने के साथ-साथ तुलसी विवाह के नियम, विवाह शुभ मुहूर्त और तुलसी विवाह अनुष्ठान करवाने से प्राप्त होने वाले लाभ के विषय में भी बताया है .
ऐसे में अगर आप लोगों ने इस लेख को शुरू से अंत तक पढ़ा होगा तो आप लोगों को तुलसी विवाह पूजा की संपूर्ण विधि नियम सहित प्राप्त हो गई होगी. तो दोस्तों मैं उम्मीद करती हूं कि आप लोगों को हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी साथ में उपयोगी भी साबित हुई होगी.





