Vishwakarma puja – भगवान विश्वकर्मा पूजा मंत्र, विधि, आरती और गायत्री मन्त्र | vishwakarma puja mantra

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Vishwakarma puja mantra | विश्वकर्मा पूजा मंत्र : देवताओं के शिल्पी कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा आदिकाल के इंजीनियर कहे जाते हैं. यह पल भर में अपनी शक्तियों के माध्यम से देवताओं के महल , भवन का निर्माण कर देता था।

विश्वकर्मा पूजा मंत्र

इसीलिए आज हर जगह उद्योग, कार्यालय, कारखाने, दुकान आदि में विश्वकर्मा पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है और vishwakarma puja mantra के माध्यम से पूजा का प्रावधान है।

विश्वकर्मा पूजा मंत्र | Vishwakarma puja mantra

दोस्तों ऋग्वेद की ऋचाओ के अनुसार विश्वकर्मा जी की कई श्लोक मंत्र हैं जिसमें से प्रमुख vishwakarma puja mantra नीचे दिया जा रहा है।

Vishwakarma

ॐ आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:।
ॐ श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः.

  1. विश्वकर्मा जी की पूजा करने के लिए प्रातः काल दैनिक दिनचर्या से निवृत्त होकर स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनकर रुद्राक्ष की माला को लेकर मंत्र का 108 बार जाप करें
  2. पूजा के दौरान किसी भी प्रकार से उठा नहीं जा सकता है इसलिए सभी प्रकार की सामग्रियों को साथ में लेकर ही बैठा जाता है।
  3. विश्वकर्मा पूजा के दौरान हाथों में फूल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मंत्र को पढ़ा जाता।
  4. पूजा के दौरान पीली सरसों लेकर सभी दिशाओं में फेंक दे और अपने हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर हाथों में लिए हुए फूलों को जल पात्र में रखकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करके विधिवत पूजा करें।
  5. पूजा स्थल पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल के फूल की तरह रंगोली बनाएं और 7 तरह के अनाज रखकर अष्टदल पर कलश रखें इसके बाद पांच प्रकार के पेड़ों के पत्ते 7 तरह की मिट्टी सुपारी और दक्षिणा कलश में डालें तत्पश्चात पूजा प्रारंभ करें।
  6. पूजा करने से पहले रक्षा दीपक जलाकर हाथ में जल और फूल व सुपारी लेकर संकल्प करके जाप कर सकते हैं. विश्वकर्मा पूजा मंत्र जाप करने के लिए आप 1100, 2100, 5100, 11000 बार जाप कर कर सकते हैं।

विश्वकर्मा जी का परिचय | Vishwakarma ji ka parichay

हिंदू धर्म में विश्वकर्मा जी को सृजन निर्माण, वास्तु कला, शिल्प कला, कारखानों, औजारों, वाहनों, मूर्तिकला के देवता के रूप में जाना जाता है। इन्हें देव शिल्पी, जगतकर्ता और शिल्पेश्वर आदि नामों से जाना जाता है। विश्वकर्मा जी का वर्णन वेदों में भी आया है और इनके नाम से ऋग्वेद के सूक्त में 11 ऋचाएँ लिखी गई हैं।

स्कंद पुराण में लिखा गया है कि विश्वकर्मा जी बृहस्पति देव की बहन भुवना का विवाह महर्षि प्रभास के साथ हुआ और भुवना ब्रह्म विद्या को जानने वाली महिला थीं. जिनके गर्भ से प्रजापति विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ।

विश्वकर्मा जी देवताओं की शिल्पशास्त्र के आचार्य और संपूर्ण सिद्धियों के जनक माने जाते हैं। विश्वकर्मा जी ने अपनी मां के गुणों के कारण एक अच्छे शिल्पकार बने और इसलिए इन्हें जगत का सृजन कर्ता, वास्तु कला, शिल्प कला निर्माण का देवता माना जाता है।

भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा वर्ष भर में कई बार मनाई जाती है महाभारत काल में इनकी पूजा का वर्णन भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा तिथि का उल्लेख मिलता है। आज के दौर में स्थिति को शिलांग और बांग्ला में प्रमुख रूप से यह त्यौहार मनाया जाता है।

कुछ जगहों पर विश्वकर्मा जी की पूजा के लिए दीपावली के 1 दिन पहले किए जाने का वर्णन मिलता है दूसरी तरफ कुछ जगह 5 मई को अंगिरा जयंती होने के कारण विश्वकर्मा पूजा का त्यौहार मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार विश्वकर्मा जी का जन्म माघ मास की त्रयोदशी शुक्ल पक्ष रविवार के दिन हुआ माना जाता है।

Vishwakarma

धर्म शास्त्रों में इस संबंध में नीचे दिया जा रहा श्लोक इस बात की पुष्टि करता है।

माघे शुकले त्रयोदश्यां दिवापुष्पे पुनर्वसौ।
अष्टा र्विशति में जातो विशवकमॉ भवनि च॥

विश्वकर्मा जी की जयंती पर आज के विद्वानों में मतभेद है और इसीलिए भारत जैसे देश में हर जगह अलग-अलग तिथियों को विश्वकर्मा पूजा और महोत्सव मनाया जा रहा है। परंतु आज के दौर में हर वर्ष 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा की जाती है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा जी की पूजा करने से व्यापार, नौकरी में उन्नति मिलती हैं और उनके आशीर्वाद से लोगों का परिवार खुशहाल रहता है। इस इस संबंध में हम आपको अपने आर्टिकल में vishwakarma puja mantra के साथ-साथ विश्वकर्मा जी की आरती के बारे में भी बताएंगे।

श्री विश्वकर्मा गायत्री मन्त्र | Shri Vishwakarma Gayatri Mantra

ॐ चतुर्भुजय विदमहे, हंसवाहनाय धीमहि । तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात ।।
ॐ प्रजापतये विदमहे, पुरुषाय धीमहि । तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात ।।

भगवान विश्वकर्मा की आरती | Bhagwan vishwakarma ki aarti

विश्वकर्मा पूजा करने के बाद विश्वकर्मा आरती करना अनिवार्य होता है क्योंकि जब तक आरती नहीं करते हैं.तब तक विश्वकर्मा पूजा पूरी होना नहीं माना जाता है. आइए हम विश्वकर्मा जी की आरती यहां पर लिख रहे हैं।

हम सब उतारे आरती तुम्हारी हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

युग–युग से हम हैं तेरे पुजारी,

हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

मूढ़ अज्ञानी नादान हम हैं,
पूजा विधि से अनजान हम हैं।

भक्ति का चाहते वरदान हम हैं,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

निर्बल हैं तुझसे बल मांगते,
करुणा का प्यास से जल मांगते हैं।

श्रद्धा का प्रभु जी फल मांगते हैं,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

चरणों से हमको लगाए ही रखना,
छाया में अपने छुपाए ही रखना।
धर्म का योगी बनाए ही रखना,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

सृष्टि में तेरा है राज बाबा,
भक्तों की रखना तुम लाज बाबा।

धरना किसी का न मोहताज बाबा,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

धन, वैभव, सुख–शान्ति देना, भय, जन–जंजाल से मुक्ति देना।

संकट से लड़ने की शक्ति देना,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

तुम विश्वपालक, तुम विश्वकर्ता,
तुम विश्वव्यापक, तुम कष्टहर्ता।

तुम ज्ञानदानी भण्डार भर्ता,
हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

भगवान विश्वकर्मा की जय। भगवान विश्वकर्मा की जय।

FAQ: Vishwakarma puja mantra 

विश्वकर्मा कौन से देवता माने जाते हैं ? 

विश्वकर्मा सृजन निर्माण के देवता माने जाते हैं और देवों के शिल्पकार माने जाते हैं कहा जाता है कि लंका के राजा रावण की लंका को विश्वकर्मा ने बनाया द्वारिका नगरी सुदामा नगरी जैसे नगरों का निर्माण विश्वकर्मा ने किया था।

विश्कर्मा जी को कौन सा प्रसाद चढ़ाते है ? 

विश्वकर्मा जी को साबुत चावल,धूप, दीपक, रक्षा सूत्र, दही, मिठाई, शस्त्र, फल, रोली, सुपारी, आदि भेंट स्वरूप चढ़ाए जाते हैं तथा किसी भी प्रकार की मिठाई का प्रसाद बांटा जा सकता है।

विश्वकर्मा किसके पुत्र हैं ?

विश्वकर्मा वास्तु देव और अंगिरा के पुत्र माने जाते हैं। इनके माता-पिता महान शिल्पकार इसलिए अपने पिता और माता के गुणों के कारण भी सृजन और निर्माण वास्तुकार और शिल्पकार के देवता के रूप में माने जाते हैं।

निष्कर्ष

हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से vishwakarma puja mantra के बारे में बताया है हम सब जानते हैं कि भगवान विश्वकर्मा सृजन और निर्माण के देवता हैं. ऐसे में एक ही पूजा बड़ी ही शुद्धता और साफ-सफाई के साथ करना चाहिए. किसी भी प्रकार के विश्वकर्मा पूजा मंत्र बहुत ही शुद्ध उच्चारण के साथ होने चाहिए।

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