सुबह की चौपाई : कहते हैं जिस घर में प्रातः काल रामचरित मानस का पाठ एवं सुबह की चौपाई होती है उस घर में कभी भी किसी प्रकार की दुविधा, असंतोष, कमी आदि नहीं आती है . रामचरित मानस एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें जीवन की संपूर्ण परेशानियों का समाधान मिलता है रामचरित मानस की हर चौपाई और मंत्र मनुष्य को अच्छी सीख देती है .

वही रामचरित मानस में कुछ चौपाइयां ऐसी भी हैं जो कि मनुष्य के जीवन में किसी भी प्रकार का छोटा या बड़ा संकट हो, उसका निवारण अतिशीघ्र हो जाता है. रामचरितमानस का शाब्दिक अर्थ है राम के कर्मों की झील अर्थात भगवान श्री राम चंद्र के संपूर्ण जीवन का उल्लेख.
आज हम आपको रामचरितमानस के कुछ ऐसी चौपाइयों के बारे में बताएंगे जिनके जाप मात्र से जीवन का हर कष्ट दूर हो जाता है और इन चौपाइयों का जाप करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. आइए जानते हैं रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों के बारे में…
- 1. आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाली चौपाई | Arthik sthiti majbut karne wali chaupai
- 2. कुबेर की कृपा पाने के लिए सुबह करें इन चौपाइयों का पाठ | Ki kripa pane ke liye subah Karen in chaupaiyan ka paath
- 3. कुबेर की कृपा पाने के लिए सुबह करें इन चौपाइयों का पाठ | Ki kripa pane ke liye subah Karen in chaupaiyan ka paath
- 4. नौकरी पाने के लिए करें इस चौपाई का जाप | Naukari pane ke liye Karen is chaupai ka Jaap
- 5. परीक्षा में सफलता पाने के लिए करें इस चौपाई का पाठ | Pariksha mein safalta pane ke liye Karen is chaupai ka path
- 6. प्रेम में वृद्धि पाने के लिए | Prem mein vriddhi pane ke liye
- 7. ईश्वर की कृपा पाने के लिए करें इन चौपाइयों का जाप | Ishwar ki kripa pane ke liye Karen in chaupaiyan ka paath
- 8. पुत्र प्राप्ति के लिए करें इस चौपाई का जाप | Putra prapti ke liye Karen is chaupai ka Jaap
- 9. हनुमान जी की चौपाई | Hanuman ji ki chaupai
- 10. हनुमान चालीसा | Hanuman chalisa
- 11. रामायण की मुख्य चौपाई | Ramayan ki mukhya chaupai
- 11.1. अर्थ
- 11.2. अर्थ
- 11.3. अर्थ
- 11.4. अर्थ
- 12. रामायण हमें क्या संदेश देना चाहती है ? | Ramayan hamen kya sandesh Dena chahti hai
- 13. FAQ : सुबह की चौपाई
- 14. निष्कर्ष
आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाली चौपाई | Arthik sthiti majbut karne wali chaupai
दोस्तों जीवन में विभिन्न प्रकार की कठिनाइयां आती है एवं हम उन कठिनाइयों का सामना भी करते हैं लेकिन यदि बहुत कोशिश करने के बाद भी आपके जीवन में आने वाले कठिनाइयां कम नहीं हो रही है.तो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथों का सहारा लेना अनिवार्य हो जाता है

इससे हमारे जीवन में आने वाली कठिनाइयां अवश्य ही कम होंगी. इसके लिए आपको सुबह उठकर स्नान करने के पश्चात रामचरितमानस की इन चौपाइयों का जाप करना चाहिए.
दोस्तों इन चौपाइयों को करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, धन, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति होती है एवं उस व्यक्ति पर भगवान श्री राम की कृपा बरसने लगती है यह चौपाई निम्न प्रकार है.
सो कर उठने के तुरंत बाद की चौपाई
प्रातः काल जागि रघुनाथा |
गुरु पितु मातु झुकावहि माथा ||
जाप करने के लिए सुबह की चौपाई
“रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई।
उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।”
कुबेर की कृपा पाने के लिए सुबह करें इन चौपाइयों का पाठ | Ki kripa pane ke liye subah Karen in chaupaiyan ka paath
सनातन धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के गुणों का गुणगान करने वाले रामचरितमानस का विशेष महत्व है रामचरितमानस की चौपाई व्यक्ति को एक नई सीख देती है वहीं कुछ चौपाइयां ऐसी भी हैं जिनका पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में धन की कमी नहीं आती है .

यदि आप जीवन में सक्सेज होना चाहते हैं तथा माता लक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हैं तो रामचरितमानस की इस चौपाई का पाठ सुबह प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के पश्चात अवश्य करें.
“जिमि सरिता सागर मंहु जाही
जद्यपि ताहि कामना नाहीं
तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं
धर्मशील पहिं जहि सुभाएं”
कुबेर की कृपा पाने के लिए सुबह करें इन चौपाइयों का पाठ | Ki kripa pane ke liye subah Karen in chaupaiyan ka paath
दोस्तों यदि आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या आप एक विद्यार्थी हैं और आपका पढ़ाई में मन नहीं लगता तो रामचरितमानस की इस चौपाई का पाठ करने से आपकी यह सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी आपका पढ़ाई में मन लगेगा एवं आप सर्वश्रेष्ठ अंको से उत्तीर्ण होंगे इस चौपाई का पाठ करने से आपके ज्ञान की बढ़ोतरी होगी तथा आपको अपने शैक्षणिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी.
“गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई।
अलपकाल विद्या सब आई ।।“
नौकरी पाने के लिए करें इस चौपाई का जाप | Naukari pane ke liye Karen is chaupai ka Jaap
दोस्तों यदि आप अपने करियर में सफल होना चाहते हैं और इसके लिए आप प्रयास भी करते हैं लेकिन आपको कोई नौकरी नहीं मिल रही है तो इसका उपाय हमारे धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस में दिया है.

रामचरितमानस के बालकांड का जाप करने से सरकारी नौकरी का योग बनता है. यदि आप भी सरकारी नौकरी की चाह रखते हैं तो आप अपनी पढ़ाई के साथ प्रातः काल इस चौपाई का जाप करें. इससे आपको सरकारी नौकरी मिलने के चांस बढ़ जाते हैं रामचरितमानस में चौपाई और दोहा अपने आप में एक मंत्र हैं यदि इन चौपाइयों का जाप विधिपूर्वक किया जाए तो व्यक्ति को हर हाल में मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई॥
जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा॥
परीक्षा में सफलता पाने के लिए करें इस चौपाई का पाठ | Pariksha mein safalta pane ke liye Karen is chaupai ka path
दोस्तों यदि आप कड़ी मेहनत करने के पश्चात भी परीक्षा में सफल नहीं हो रहे हैं और परीक्षा में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण होना चाहते हैं तो इस चौपाई का जाप अवश्य करें.
जेहि पर कृपा करहि जनु जानी।
कवि उर अजिर नचावहि बानी।।
मोरि सुधारिहि सो सब भांति।
जासु कृपा नहि कृपा अघाति।।
प्रेम में वृद्धि पाने के लिए | Prem mein vriddhi pane ke liye
दोस्तों यदि आपके और आपके पार्टनर के बीच प्रेम कम हो गया है या आपका पार्टनर अब आप से प्रेम नहीं करता है तो इसके लिए आपको रामचरितमानस की चौपाई का पाठ करना चाहिए इससे आपका पार्टनर आपसे अनंत एवं अथाह प्रेम करने लगेगा.
सब नर करहिं परस्पर प्रीती ।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती ।।
ईश्वर की कृपा पाने के लिए करें इन चौपाइयों का जाप | Ishwar ki kripa pane ke liye Karen in chaupaiyan ka paath
दोस्तों यदि आप अपने जीवन से तंग आ चुके हैं और आप चाहते हैं कि ईश्वर आपकी सहायता करें तो आपको सुबह उठकर इन चौपाइयों का पाठ करना चाहिए इन चौपाइयों का पाठ करने से ईश्वर आपकी सहायता अवश्य करेंगे.
मामभिरक्षक रघुकुल नायक |
घृत वर चाप रुचिर कर सायक ||
राजिव नयन धरे धनु सायक |
भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक ||
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ |
एहि अवसर सहाय सोई होऊ ||
वंदौ बाल रूप सोई रामू |
सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू ||
पुत्र प्राप्ति के लिए करें इस चौपाई का जाप | Putra prapti ke liye Karen is chaupai ka Jaap
यदि आप के विवाह के कई वर्ष पश्चात भी आपको पुत्र की प्राप्ति नहीं हो रही और आप चाहते हैं कि जल्द से जल्द आपको पुत्र की प्राप्ति हो तो इस चौपाई का जाप सुबह स्नान करने के पश्चात अवश्य करें इससे आपको अतिशीघ्र पुत्र की प्राप्ति होगी .
सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपने बस करि राखे रामू॥
नित्य सुबह उठकर स्नान करके इस चौपाई का पाठ करने से ईश्वर आपकी हर तरह की समस्याएं हर लेते हैं और इस चौपाई का पाठ करने वाले व्यक्ति पर अपनी कृपा बनाते हैं .
राम भक्ति मणि उस बस जाके |
दुःख लवलेस न सपनेहु ताके ||
यदि आप बीमारियों से ग्रसित रहते हैं और बार-बार दवा करने के पश्चात भी आपकी बीमारी आपका पीछा नहीं छोड़ती हैं तो नित्य सुबह इस चौपाई का पाठ करने से आप की बीमारी आपका साथ छोड़ देंगी .
दैहिक दैविक भोतिक तापा |
राम राज्य नहिं काहुहि व्यापा ||
दोस्तों रामायण में बहुत सी चौपाइयों का वर्णन किया गया है तथा हर चौपाई का अपना अलग-अलग महत्व एवं कार्य है इस चौपाई का पाठ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके करने से आपकी सभी मनोकामनाएं अतिशीघ्र पूर्ण होंगी.
‘जो भगवान दीनदयाल कहावा|
आरति हरन बेद जस गाबा ||
जपहिं नामू जन आरत भारी|
मिटहिं कुंसकट होहिंघारी||
दीनदयाल बिरद संभारी|
हरहु नाथ मम संकट भारी’
हनुमान जी की चौपाई | Hanuman ji ki chaupai
दोस्तों श्री हनुमान जी कलयुग के पूजनीय देवी देवताओं में से गिने जाते है ऐसा कहा जाता है कि कलयुग में श्री हनुमान रामेश्वरम गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा का पाठ हजारों मंत्रों के बराबर होता है.

हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ यदि प्रतिदिन किया जाए तो व्यक्ति की सभी परेशानियों का समाधान होता है और श्री हनुमान जी उस व्यक्ति पर अपनी कृपा बनाते हैं और उसे भय मुक्त करते हैं
भूत पिशाच निकट नहीं आवे ।
महावीर जब नाम सुनावे ।।
यदि किसी व्यक्ति को सदैव किसी न किसी चीज का भय, रोग, पीड़ा आदि रहता है तो नियमित रूप से इस चौपाई का पाठ करें.
नासे रोग हरे सब पीरा।
जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।
जो व्यक्ति सदैव किसी न किसी रोग से पीड़ित रहता है उस व्यक्ति को सुबह और शाम इस चौपाई का पाठ हनुमान जी का नाम लेकर करना चाहिए.
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्रजी के काज संवारे।।
जो व्यक्ति अपने शत्रुओं से सदैव परेशान रहता है उस व्यक्ति को हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ प्रत्येक दिन 108 बार अवश्य करना चाहिए इससे उस व्यक्ति को अपने शत्रुओं से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है.
अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
दोस्तों हनुमान चालीसा की इस चौपाई का महत्व सबसे अधिक है क्योंकि हनुमान जी आठ सिद्धियों और नौ निधियों को देने वाले हैं
भगवान श्री हनुमान को यह वरदान माता सीता ने दिया था.
हनुमान चालीसा | Hanuman chalisa
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई |
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन।।
विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को भावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
श्री हनुमान चालीसा का पाठ नित्य सुबह करने से व्यक्ति के जीवन कि हर तरह की समस्या का समाधान होता है इस चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति से भगवान हनुमान प्रसन्न होते हैं.
रामायण की मुख्य चौपाई | Ramayan ki mukhya chaupai
बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥
सतसंगत मुद मंगल मूला। सोई फल सिधि सब साधन फूला॥4॥
अर्थ
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम जी की कृपा के बिना सत्संग नहीं मिलता सत्संगति आनंद और कल्याण की जड़ है दुष्ट लोग भी सत्संगति पाकर अच्छे हो जाते हैं जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सुंदर सोना बन जाता है.
हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥
रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥
अर्थ
हरि अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है जब संत लोग उसे बहुत प्रकार से कहते सुनते हैं रामचंद्र का सुंदर चरित्र करोड़ों कल्पों में भी नहीं गा सकते है .
जासु नाम जपि सुनहु भवानी।
भव बंधन काटहिं नर ज्ञानी॥
तासु दूत कि बंध तरु आवा।
प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा॥
अर्थ
शिव कहते हैं, हे भवानी सत्य नाम जप कर ज्ञानी मनुष्य संसार रूपी जन्म मरण के बंधन को काट देता है क्या उनका दूत किसी बंधन में बंध सकता है लेकिन प्रभु जी के कार्य के लिए हनुमान जी ने स्वयं को शत्रु के हाथ से बंधवा दिया.
सुमति कुमति सब कें उर रहहीं।
नाथ पुराण निगम अस कहीं॥
जहाँ सुमति तहँ संपति नाना।
जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥
अर्थ
हे नाथ ! पुराण और वेद ऐसा कहते हैं कि सुबुद्धि और कुबुद्धि प्रत्येक हृदय में रहती है जहां सद्बुद्धि है वहां विभिन्न प्रकार की संपत्ति रहती है और जहां कुबुद्धि वहां विभिन्न प्रकार की विपत्ति का वास रहता है .
रामायण हमें क्या संदेश देना चाहती है ? | Ramayan hamen kya sandesh Dena chahti hai
रामायण हमें यह संदेश देना चाहती है कि अच्छे कर्म व्यक्ति को ऊपर की ओर ले जाते हैं और बुरे कर्म व्यक्ति को नीचे की ओर खिंचते हैं अर्थात यदि आप अच्छे कर्म करते हैं तो संसार में आपकी प्रतिष्ठा रहती है तथा मृत्यु के बाद आपको मोक्ष की प्राप्ति होती है और यदि आप बुरे कार्य करते हैं तो यह संसार आपको दुत्कार देता है तथा मृत्यु के बाद आपको विभिन्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है.
FAQ : सुबह की चौपाई
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दोस्तों इस लेख में हमने आपको सुबह की चौपाई, रामचरित मानस का अर्थ , दोहा, हनुमान चालीसा, हनुमान जी की चौपाई एवं रामचरितमानस की मुख्य चौपाइयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है हमारी कोशिश सदा आप तक उचित जानकारी पहुंचाना नहीं है एवं हम इस कार्य के लिए सदैव तत्पर रहते हैं दोस्तों इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है OSir.in इसकी पुष्टि नहीं करता है आशा करते हैं आपको यह लेख पसंद आया होगा एवं अपने जीवन की समस्याओं के निवारण के लिए इस लेख को एक बार पुनः अवश्य पढ़ें.





