Police call details kaise nikalti hai ? हमारे भारतीय संविधान Constitution में नागरिकों को कई अधिकार दिए गए हैं। वहीं भारतीय संविधान के अंतर्गत ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए विभिन्न प्रकार की फोर्स इंडिया में बनाई गई है। जिस प्रकार बॉर्डर पर बीएसएफ हमारे देश की सीमा की रक्षा करती है उसी प्रकार भारत देश के अंदर में लोगों की रक्षा करने का काम और अपराध पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है ।
पुलिस डिपार्टमेंट इंडिया के हर राज्य में है और लगभग इंडिया India के हर राज्य के पुलिस डिपार्टमेंट की वर्दी का कलर खाकी होता है । सिर्फ कोलकाता शहर की पुलिस की वर्दी का रंग सफेद होता है ।
- 1. पुलिस कॉल डिटेल कैसे निकालते है | How to get police call details
- 2. पुलिस कॉल डिटेल निकालने के लिए क्या करती है ? What does police do to get call details
- 3. सीडीआर क्या होता है ? | What is cdr
- 4. क्या सीडीआर का इस्तेमाल हर कोई कर सकता है ? Whether to use CDR
- 5. इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सीडीआर कब तक मिल जाता है ? CDR to Investigation Agency
- 6. क्या सही लोकेशन का पता सीडीआर से चल जाता है ?
पुलिस कॉल डिटेल कैसे निकालते है | How to get police call details
आपने अक्सर पिक्चर में यह देखा होगा कि जब पुलिस किसी अपराधी को पकड़ पाने में असमर्थ होती है तब वह उसे पकड़ने के लिए तरह-तरह के उपाय करती है, जिसमें से ही एक उपाय होता है कॉल डिटेल निकालना ।
हालांकि पहले यह टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा प्रचलित नहीं थी परंतु आजकल टेक्नोलॉजी का विकास हो जाने के कारण अब पुलिस कई मामलों में अपराधी तक पहुंचने के लिए कॉल डिटेल निकालती है अथवा किसी केस को सुलझाने के लिए कॉल डिटेल निकालती है ।
इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि पुलिस कॉल डिटेल कैसे निकालती है अथवा पुलिस कॉल डिटेल निकालने के लिए क्या करती है।
पुलिस कॉल डिटेल निकालने के लिए क्या करती है ? What does police do to get call details
हम जिस किसी भी सिम का इस्तेमाल फोन कॉल करने के लिए या फिर इंटरनेट चलाने के लिए करते हैं उस सिम कार्ड की कंपनी के पास हमारे सिम कार्ड से संबंधित सारी जानकारी होती है।
जैसे कि हमारे फोन में कितना बैलेंस बचा हुआ है,हमारे सिम कार्ड का प्लान कब एक्सपायर हो रहा है, हमारा सिम कार्ड किसके नंबर पर है, हमारे सिम कार्ड में किसकी आईडेंटिटी लगी हुई है इत्यादि।
जब किसी केस की छानबीन करने के मामले में पुलिस को कॉल डिटेल की आवश्यकता होती है अथवा किसी अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस को कॉल डिटेल की आवश्यकता होती है तो वह उस टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करती है जिसका नंबर पुलिस के पास होता है और पुलिस अपने पास मौजूद उस नंबर को टेलीकॉम इंडस्ट्री को बताती है जिस की कॉल डिटेल उसे प्राप्त करनी होती है।
हालांकि हम आपको यहां पर बता दें कि पुलिस के पास कॉल डिटेल निकालने के लिए ठोस आधार होना चाहिए तभी कंपनी उसे किसी नंबर की कॉल डिटेल देती है। इसके अलावा पुलिस के पास अदालत के द्वारा परमिशन भी होनी चाहिए।
जब पुलिस कोरट की परमिशन और ठोस कारणों के साथ कंपनी में किसी नंबर की कॉल डिटेल निकालने के लिए जाती है तो उस कंपनी के ऑफिसर के द्वारा उस नंबर की कॉल डिटेल पुलिस को प्रदान की जाती है।
क्रिमिनल केत या पर किसी भी बड़े मैटर में अदालत के पास और इन्वेस्टिगेशन करने वाली टीम के पास कॉल डिटेल निकालने का अधिकार होता है, जिसका इस्तेमाल करके वह टेलीकॉम कंपनी से किसी भी नंबर की कॉल डिटेल की डिमांड कर सकती है।
अगर पुलिस किसी नंबर की कॉल डिटेल देखना चाहती है तो इसके लिए सबसे पहले उसे टेलीकॉम कंपनी को एक लेटर भेजना होता है जिसमें यह बताया गया होता है कि उन्हें कॉल डिटेल क्यों चाहिए।
बिना टेलीकॉम कंपनी के समर्थन के पुलिस कॉल डिटेल नहीं प्राप्त कर सकती है। अधिकतर केस में पुलिस को कॉल डिटेल निकालने के लिए कोर्ट से परमिशन लेनी होती है।आपको बता दें कि, टेलीकॉम कंपनी किसी भी सिम कार्ड के कॉल डिटेल का डाटा तकरीबन 3 साल तक ही स्टोर करके रखती है।
सीडीआर क्या होता है ? | What is cdr
सीडीआर का पूरा नाम कॉल डिटेल रिकॉर्ड होता है जिसके अंतर्गत जो व्यक्ति सिम कार्ड यूज करता है उसका नाम, उसने टोटल कितने कॉल किए हैं इसकी जानकारी, उसने टोटल कितने कॉल रिसीव किए हैं इसकी इंफॉर्मेशन
,उसने किन-किन नंबर पर फोन कॉल किया है इसकी इंफॉर्मेशन, कॉल करने की तारीख टाइम जैसे जानकारी होती है।
इसके अलावा इसमें यह भी होता है कि व्यक्ति ने किस नंबर पर मैसेज किया है और किस नंबर से उसे मैसेज प्राप्त हुआ है।
हालांकि टेलीकॉम कंपनी के पास इस बात का कोई भी इंफॉर्मेशन अथवा डाटा नहीं होता है कि व्यक्ति ने जिस नंबर पर मैसेज किया है अथवा जिस नंबर से उसे मैसेज प्राप्त हुआ है उसमें क्या लिखा हुआ था। सीडीआर से इस बात की भी जानकारी प्राप्त होती है कि व्यक्ति को किस लोकेशन से कॉल आया था।
इसके अलावा इस बात की भी जानकारी प्राप्त हो जाती है कि व्यक्ति ने जिस व्यक्ति को फोन किया था उसकी लोकेशन क्या है और कॉल किस कारण से कटी नॉर्मल तरीके से या फिर ड्रॉपआउट हुआ।अक्सर पुलिस अपराधी की लोकेशन ट्रेस करने के लिए टेलीकॉम कंपनी की सहायता से उसकी लोकेशन को ट्रेस करती है।
क्या सीडीआर का इस्तेमाल हर कोई कर सकता है ? Whether to use CDR
बता दें कि सीडीआर का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता है। हमारे भारत देश में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और पुलिस जैसी जो इन्वेस्टिगेशन एजेंसी है, उन्हें किसी केस के मामले की इन्वेस्टिगेशन के दरमियान सीडीआर का इस्तेमाल करके जानकारी जुटाने का अधिकार प्राप्त है।
परंतु इसके लिए भी उन्हें परमिशन लेनी पड़ती है।इसके अलावा आपको बता दें कि बंबई हाईकोर्ट ने साल 2014 में सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया को भी सीडीआर एक्सेस करने की परमिशन दी है ताकि वह मार्केट में चलने वाले घोटाले की जांच कर सके और उसे रोक सके।
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इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सीडीआर कब तक मिल जाता है ? CDR to Investigation Agency
आपको बता दें कि किसी गंभीर अपराध जैसे कि आतंकवादी गतिविधि, किसी का मर्डर हो गया हो, कोई बलात्कार का मामला हो, कोई क्रिमिनल फरार हो गया है और उसे तुरंत गिरफ्तार करने की आवश्यकता है तो ऐसी अवस्था में मेल प्राप्त होने के बाद अथवा लेटर प्राप्त होने के बाद मोबाइल नेटवर्क सर्विस देने वाली कंपनी के द्वारा तकरीबन आधे घंटे में इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को कॉल डिटेल रिकॉर्ड दे दी जाती है।
सामान्य तौर पर मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियां इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को 1 साल तक का कॉल डिटेल रिकॉर्ड देती है और अगर इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को पुराने कॉल रिकॉर्ड भी चाहिए तो उसे अपने सीनियर पुलिस ऑफिसर से स्पेशल परमिशन लेनी होती है।
क्या सही लोकेशन का पता सीडीआर से चल जाता है ?
आपको बता दें कि, किसी व्यक्ति की लोकेशन की जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल टावर का इस्तेमाल किया जाता है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनी टावर नंबर को बताती हैं।
जब कोई अपराधी कॉल करता है तो जिस टावर से उसे नेटवर्क प्राप्त होता है उस टावर का पता मोबाइल नेटवर्क सर्विस देने वाली कंपनी को चल जाता है।
सामान्य तौर पर फोन टावर जहां पर स्थित होता है उसके आसपास के तकरीबन 500 मीटर के रेडियस को कवर करता है और पुलिस जीपीएस एप्लीकेशन की सहायता से 500 मीटर के दायरे में व्यक्ति की एग्जैक्ट लोकेशन की जानकारी हासिल कर लेती है।








