पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kya bolna chahiye : हेलो मित्रों नमस्कार आज का यह लेख पूजा पाठ की जानकारी से संबंधित है. जिसमें हम बताएंगे कि पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ? यानी की अगर आप किसी भी देवी-देवता की पूजा कर रहे हैं तो उस पूजा के प्रारंभ से लेकर पूजा के पूर्ण होने तक कब क्या बोलना चाहिए ? इसके विषय में बताएंगे.
हिंदू धर्म में हर देवी-देवता की पूजा-पाठ के लिए अलग-अलग दिन, अलग-अलग पूजा विधि और अलग-अलग मंत्र प्रचलित हैं इसीलिए किसी भी देवी-देवता की पूजा करने से पहले उस देवी-देवता से संबंधित पूजा विधि, पूजा नियम, और पूजा में बोले जाने वाले मंत्रों की जानकारी अच्छे से प्राप्त कर लेनी चाहिए ताकि पूजा में कोई भी भूल न हो .

पूजा में किसी भी प्रकार की भूल चूक होना काफी अपशकुन माना जाता है इसीलिए आज हम इस लेख में पूजा के इस महत्व को ध्यान में रखते हुए बताएंगे कि पूजा में कब क्या बोलना चाहिए ? जिससे हमारे द्वारा की गई पूजा पूर्ण रूप से सफल हो सके.
ऐसे में जो लोग इस जानकारी को पाना चाहते हैं तो उन लोगों से मेरा निवेदन है कि आप लोग कृपया करके इस लेख को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें.
- 1. पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kya bolna chahiye?
- 2. मनोकमाना पूर्ति के लिए भगवान से प्रार्थना कैसे करें ? | Manokamna purti ke liye bhagwan se prathna kaise kare ?
- 2.1. 1. पूजा करते समय बोलना चाहिए या नहीं
- 2.2. 2. मासिक धर्म के समय पूजा करनी चाहिए या नहीं
- 2.3. 3. पूजा करने के बाद तुरंत खाना खाना चाहिए या नहीं
- 3. नित्य पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें | Nity puja me dhyan rakhne yogya bate
- 4. FAQ: पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ?
- 4.1. नित्य पूजा करने से क्या लाभ होता है ?
- 4.2. हिंदू धर्म में कितनी देवियों का प्रचलन है ?
- 4.3. पूजा के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा माना गया है ?
- 5. निष्कर्ष
पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kya bolna chahiye?
आइए जानते हैं पूजा के प्रारंभ से लेकर पूजा के अंत तक कब क्या बोलना चाहिए.
1. अगर आप किसी भी देवी-देवता की पूजा कर रहे हैं तो सबसे पहले पूजा के प्रारंभ में आप भगवान को प्रणाम करें उसके बाद भगवान के समक्ष एक दीपक जलाएं और दीपक जलाते समय नीचे बताए गए मंत्र का जाप करें.

दीप मंत्र
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।
2. इस मंत्र का जाप करने के बाद आप भगवान से संबंधित फल, फूल ,अक्षत , पूजा कि जो भी सामग्री लगती हो वह भगवान के समक्ष अर्पित कर दें.
3. भगवान के समक्ष पूजा की सारी सामग्री अर्पित करने के बाद आप जिस देवी-देवता की पूजा करते हैं. उस देवी-देवता से संबंधित भोग लगाएं.
भोग लगाते समय नीचे बताए जा रहे हैं, मंत्र का जाप अवश्य करें
भोग लगाने का मंत्र
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये ।
गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
मंत्र का अर्थ- इस मंत्र का अर्थ है, हे प्रभु मेरे पास जो कुछ भी है. सब आपका ही दिया हुआ है और आपका दिया हुआ ही मैं आपको भोग लगा रहा हूं कृपया करके इस भोग को स्वीकार करें.
4. भगवान को भोग लगाने के बाद आप अपने देवी-देवता से संबंधित आरती की थाल सजाएं और ईश्वर की आरती करें.
5. आरती करने के बाद आरती का धुआं घर की चारों दिशाओं में फैला दें ताकि घर से नकारात्मक शक्तियां निकलकर सकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाए.
6. उसके बाद आरती को भगवान के समक्ष रख दे फिर भगवान के सामने हाथ जोड़कर नीचे बताए जा रहे हैं, मंत्र का जाप करके पूजा में हुई भूल चूक के लिए भगवान से क्षमा मांगे.

पूजा में हुई भूल चुके लिए क्षमा मांगने का मंत्र
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां श्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्मतु।
अर्थ – इस मंत्र का अर्थ यह है कि हे प्रभु ! न तो मैं आपको बुलाना जानता हूं और न ही आपको विदा करना जानता हूं यहां तक की मैं तो आपकी पूजा भी नही करना जानता हु, ऐसे में मुझसे हुई गलतियों को कृपा करके क्षमा करें। मुझे न मंत्र याद है और न ही क्रिया पाठ याद है.
मैं भक्ति करना भी नहीं जानता। यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपया मेरी भूलों को क्षमा कर इस पूजा को पूर्णता प्रदान करें।
7. इस तरह से आप भगवान से पूजा में हुई भूल चूक के लिए क्षमा याचना मांगने के बाद अपने भगवान से संबंधित प्रसाद अपने आसपास के लोगों में अर्पित करें और खुद उस प्रसाद को ग्रहण करके पूजा को पूर्ण करें. इस तरह से देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए.
मनोकमाना पूर्ति के लिए भगवान से प्रार्थना कैसे करें ? | Manokamna purti ke liye bhagwan se prathna kaise kare ?
वैसे हर कोई अपनी-अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान से अपने अपने अनुसार प्रार्थना कर सकता है क्योंकि हमारे अंदर जो शब्द ईश्वर के लिए होते हैं अगर हम उन्हें ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत करते हैं तो हमारे मन को संतुष्टि मिलती है और ऐसा लगता है कि हां भगवान हमारी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे .
बेशक आप कभी-कभी भगवान को याद करो, लेकिन सच्चे मन से करो तो भगवान आपकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे.

1. पूजा करते समय बोलना चाहिए या नहीं
यहां पर मैं अपने विचार प्रस्तुत करते हुए बता रही हूं कि किसी भी देवी-देवता की पूजा करते समय किसी से भी किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं करनी चाहिए, जब पूजा पूरी तरह से पूर्ण हो जाए उसके बाद आप लोगों को प्रसाद अर्पित करें, भगवान से पूजा में हुई भूल चूक के लिए क्षमा-याचना मांगे उसके बाद आप किसी से भी कोई भी बात कर सकते हैं
2. मासिक धर्म के समय पूजा करनी चाहिए या नहीं
अगर कोई महिला प्रतिदिन किसी भी देवी-देवता की पूजा करती है, लेकिन जब उसे मासिक धर्म आ जाता है तो उसे पूजा करना तो दूर की बात है यहाँ तक पूजा घर में भी नहीं जाना चाहिए क्योंकि महावारी के समय महिलाएं आपवित्र मानी जाती हैं.
ऐसे में अगर वह मंदिर में जाएगी तो मंदिर भी अपवित्र हो जाता है साथ में देवी-देवता भी क्रोधित हो जाते हैं इसीलिए मासिक धर्म के समय महिलाओं को पूजा नहीं करनी चाहिए.
3. पूजा करने के बाद तुरंत खाना खाना चाहिए या नहीं
किसी भी देवी-देवता की पूजा करने के तुरंत पश्चात खाना नहीं खाना चाहिए. ऐसा करने से हमें पूजा का उतना लाभ नहीं मिल पाता है, जितना मिलना चाहिए क्योंकि पूजा करने के तुरंत पश्चात भोजन करने से हमारे द्वारा की गई पूजा के समय प्रार्थना पर काफी ज्यादा असर पड़ता है इसीलिए पूजा के आधा या एक घंटा बाद भोजन करना उचित माना जाता है.
नित्य पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें | Nity puja me dhyan rakhne yogya bate
अगर कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन किसी भी देवी-देवता की पूजा करता है, तो उसे कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जिन्हें नीचे क्रम से बताया जा रहा है.
1. अगर आप किसी भी देवी देवता की पूजा कर रहे हैं तो आप अपने देवी-देवता से संबंधित फूलों का ही प्रयोग करें क्योंकि हर देवी-देवता के लिए अलग-अलग फूलों का महत्व बताया गया है इसलिए अपने देवता या देवी से संबंधित ताजे फूल पूजा में प्रयोग करने चाहिए.
2. पूजा में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए.
3. घर में हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में अपने देवी-देवताओं की मूर्ति यां फोटो स्थापित करें.
4. देवी और देवता की फोटो के साथ में अपने पूर्वजों की फोटो को न लगाएं.
5. पूजा करते समय किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए.
6. महिलाओं को पूजा करते समय भारी मेकअप नहीं करना चाहिए.
7. पंचदेव भगवान को तुलसी नहीं अर्पित करनी चाहिए.
8. भगवान विष्णु को बिना तुलसी के भोग नहीं लगाना चाहिए.
FAQ: पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए ?
नित्य पूजा करने से क्या लाभ होता है ?
नित्य पूजा करने से हमारे जीवन में सुख शांति समृद्धि आती है और साथ में हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
हिंदू धर्म में कितनी देवियों का प्रचलन है ?
हिंदू धर्म में नौ देवियों का प्रचलन है जिसमें से मां दुर्गा को सबसे बड़ी देवी मानी जाती है और 8 देवियां मां दुर्गा का अंश मानी जाती है.
पूजा के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा माना गया है ?
हिंदू धर्म में प्रातः काल और सूर्यास्त के समय पूजा करना बहुत उत्तम समय माना जाता हैं.
निष्कर्ष
प्रिय मित्रों जैसा कि आज के इस लेख में हमने पूजा में क्या बोलना चाहिए ? इसके विषय में जानकारी बताई हैं. जिसमें हमने पूजा में क्या बोलना चाहिए ? इस टॉपिक पर विशेष जानकारी बताने का प्रयत्न किया है .
अगर आप लोगों ने इस, लेख को शुरू से अंत तक पढ़ा होगा तो आप लोगों को पूजा में क्या बोलना चाहिए ? इस विषय पर अच्छी खासी जानकारी प्राप्त हो गई होगी क्योंकि हमने इस लेख में बताया है किसी भी देवी-देवता की पूजा प्रारंभ करने से लेकर पूजा के पूर्ण रूप से संपन्न होने तक कब क्या बोलना चाहिए ? इसके विषय में विस्तार से बताया है.
जिसे पढ़कर आप लोग इस टॉपिक से जुड़ी अच्छी खासी जानकारी पा सकते हैं तो मित्रों हम उम्मीद करते हैं आप लोगों को हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी साथ में उपयोगी भी साबित हुई होगी.







