भैया दूज पौराणिक कथा : भाई दूज क्यों और कैसे मनाई जाती है? सही तरीका | bhaiya dooj ki kahani

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Bhaiya dooj ki kahani | भैया दूज की कहानी :  हेलो हमारे प्रिय भाईयो एवं बहनों आज मै इस लेख में आप लोगों को bhaiya dooj ki kahani बताऊंगी , ताकि आप लोग भैया दूज कहानी के महत्व को समझ सके .भैया दूज हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है.

इस दिन बहन अपने भाई के लंबी आयु और उज्जवल भविष्य के लिए भाई के लिए व्रत रखती हैं. जिसमें वह भईया दूज व्रत के सभी नियमों का पालन करके, अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके हाथ में कलावा बांधती हैं फिर अपने भाई की आरती उतारती हैं. उसके पश्चात भाई बहन के पैर छूकर बहन का आशीर्वाद प्राप्त करता हैं.

भैया दूज की कहानी

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भैया दूज कहानी को लेकर पौराणिक कथाओं में ऐसी मान्यता बताई गई है कि इस दिन अगर भाई बहन गंगा नदी में एक साथ डुबकी लगाकर स्नान करते है. तो उन्हें यमराज के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिल जाती हैं.

भैया दूज व्रत को करने के पीछे एक पुरानी कहानी बताई गई है. जिसकी वजह से भैया दूज व्रत का महत्व माना जाता हैं, वह क्या कहानी है ? जिसकी वजह से भैया दूज मनाया जाता है. उसके बारे में हम इस आर्टिकल में एक विस्तार पूर्वक से बताएंगे. ऐसे में अगर आप लोग भैया दूज कहानी से परिचित होना चाहते हैं, तो कृपया करके इस लेख को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें.

भाई दूज क्यों और कैसे मनाई जाती है ?

अगर आप में से कोई भी व्यक्ति इस बात की जानकारी चाहता है कि भाई दूज क्यों और कैसे मनाई जाती है तो भाई दूज को लेकर एक पौराणिक कथा बहुत ही प्रसिद्ध है कहा गया है कि हमारी धार्मिक मान्यताओं में भाई दूज के दिन अगर भाई यमुना नदी से स्नान करते हैं.

तो उन्हें यमराज के महा प्रकोप से छुटकारा मिल जाता है इसके अलावा पौराणिक कथाओं में ऐसा कहा गया है कि जिस दिन भाई दूज मनाया जाता है उस दिन यमराज ने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया था कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज मनाया जाने लगा.

भैया दूज की कहानी | Bhaiya dooj ki kahani

भैया दूज व्रत के पीछे एक पौराणिक कहानी बताई गई है. जिसे हम यहां पर एक विस्तार से बता रहे हैं. भैया दूज कहानी को लेकर बताया जाता है कि सूर्य देव की पत्नी जिनका नाम संज्ञा था. जिसने सूर्य देव से विवाह के पश्चात् एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया. पुत्र का नाम यमराज और पुत्री का नाम यमुना था.

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लेकिन एक समय ऐसा आया जब संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थी. तब उसने अपनी एक छायामूर्ति बनाकर उसको अपने पुत्र यमराज और पुत्री यमुना के पास छोड़कर चली गई.

संज्ञा की छाया मूर्ति यम और यमुना से ज्यादा स्नेह नहीं करती थी, मगर यमराज अपनी बहन यमुना से बेहद स्नेहा करता था. जब यमुना बड़ी हो गई तो उसका विवाह हो गया. उसके बाद काफी समय बीत गया.  यमराज अपनी बहन से मिलने के लिए नहीं गया.

बहन यमुना अपने भाई को अपने घर बुलाने का निमंत्रण देती है. मगर काम में व्यस्त होने के कारण यमराज को अपनी बहन के घर जाने के लिए समय ही नहीं मिलता था. 1 दिन यमराज ने अपनी बहन के यहां जाने का निर्णय लिया.

एक दिन स्नान आदि से निवृत होकर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने के लिए चल दिए. उस दिन उन्होंने नर्क में बंद सभी आत्माओं को मुक्त कर दिया था. जब वह अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे तो इनकी बहन यमुना अपने भाई को देखकर बहुत खुश हुई तथा उन्हें अंदर बुलाया और उनका मान सम्मान किया. पलंग पर बिठाया फिर अपने भाई को बड़े ही स्नेह पूर्वक से तरह-तरह के व्यंजन बनाकर खिलाएं.

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उसके बाद अपने भाई के माथे पर तिलक किया और हाथ में कलावा बांधा और आरती की यह मान-सम्मान देखकर यमराज अपनी बहन यमुना से बेहद ज्यादा प्रसन्न हो गए. उन्होंने उस खुशी में अपनी बहन से कोई वरदान मांगने की इच्छा जाहिर की उन्होंने कहा बहन आज आपने मेरा दिल खुश कर दिया है.

आपको हमसे जो चाहिए. वह मांग सकती हो. बहन ने भाई की इस बात को सुनकर कहा भैया अगर आप मुझे कुछ देना ही चाहते हैं. तो यही वरदान दीजिए कि आज के दिन आप मेरे घर हमेशा आएंगे और हमारा आतिथ्य स्वीकार किया करेंगे और इस दिन जो भी बहन अपने भाई को टीका लगाकर उसके हाथ पर कलावा बांधते हुए, भाई की लंबी आयु तथा उसके उज्जवल भविष्य की कामना करें, तो उन्हे आपका भय ना रहे.

बहन यमुना के इस इच्छा को सुनकर यमराज बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने अपनी बहन की इस इच्छा को स्वीकार कर लिया और तभी से भैया दूज व्रत का प्रचलन बढ़ा फिर सभी बहन अपने भाई की लंबी आयु तथा उसके उज्जवल भविष्य हेतु भैया दूज का व्रत रखने लगी.

तो हमारी प्रिय बहनों एवं भाइयों यही है. भैया दूज की संपूर्ण कहानी जिसकी वजह से आज हम लोगों को अपने भाई की लंबी आयु और उनकी उज्जवल भविष्य के लिए व्रत रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.

FAQ : Bhaiya dooj ki kahani

भैया दूज और रक्षाबंधन में अंतर क्या है ?

भैया दूज में भाई खुद बहन के घर टीका लगवाने जाता है जबकि रक्षाबंधन में बहन भाई के घर भैया की कलाई में राखी बांधने आती है.

भाई दूज क्यों मनाया जाता है ?

भैया दूज की लंबी आयु और उज्जवल भविष्य के लिए मनाया जाता है.

भाई दूज पर किसकी पूजा होती है ?

हालाकि आज के समय में हर कोई भाई दूज पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करता है लेकीन पौराणिक कथाओं में बताया गया भैया दूज वाले दिन यमराज की पूजा होती है क्योंकि यमराज अपनी बहन यमुना के घर मिलने गए थे तभी यमुना ने उनके माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती की थी और तब से लेकर भैया दूज मनाया जाने लगा इसीलिए इस दिन यमराज की ही पूजा करनी चाहिए .

निष्कर्ष

तो हमारी प्रिय बहनों एवं भाइयों जैसा कि आज हमने इस आर्टिकल में भैया दूज कहानी टॉपिक पर जानकारी प्रदान की है. जिसमें हमने भैया दूज की पूरी कहानी बताई है. जिसको पढ़ने के बाद आप लोग जान गए होंगे कि भैया दूज व्रत करने का प्रचलन किस प्रकार से शुरू हुआ और इस व्रत का बहन और भाई के जीवन में कितना महत्व है.

तो प्रिय बहनों मैं उम्मीद करती हूं आप लोगों को हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी साथ में उपयोगी भी साबित हुई होगी.

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