नमाज की दुआ हिंदी में | Namaz ki dua hindi mein : अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहु दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम अब लोगों को बताएंगे नमाज की दुआ हिंदी में जिससे आप बहुत आसानी से नमाज की दुआ याद कर सकते हैं और जब नमाज पढ़ने तो इन दवाओं को पढ़ सकते हैं.

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नमाज की दुआएं बहुत छोटी सी होती हैं इनको याद करने में ज्यादा मुश्किलात नहीं आते हैं क्योंकि यह दुआएं ज्यादा बड़ी नहीं होती है। इनको आसानी से याद किया जा सकता है लेकिन जिन लोगों को अरबी नहीं आती है उनके लिए यह बहुत मुश्किल होता है और वह अक्सर सोचा करते हैं कि हमें अरबी नहीं आती.
इसलिए हम नमाज नहीं पढ़ सकते दोस्तों आप लोगों को बता दें कि नमाज पढ़ने में अरबी की कोई भी जरूरत नहीं है बस आपको नमाज के कायदे और नमाज पढ़ने का सही तरीका और नमाज में क्या पढ़ा जाता है यह पता होना चाहिए और इससे आप हिंदी में में भी पढ़ सकते हैं अगर आपको याद करना है तो आप इससे आसानी से पढ़ कर याद कर सकते हैं तो आइए जानते हैं नमाज की दुआ हिंदी में.
अगर आप लोग यह जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को आखिर तक पढ़ लीजिए आप लोगों को नमाज में क्या पढ़ा जाता है और कैसे पढ़ा जाता है सब की जानकारी हासिल हो जाएगी।
नमाज की दुआ हिंदी में | Namaz ki dua hindi mein
दोस्तों आज हम आप लोगों को बताएंगे कि नमाज की दुआ हिंदी में के बारे में बताएँगे दोस्तों यह हर मुसलमान कराना बहुत जरूरी है कि नमाज में क्या पढ़ा जाता है बहुत से ऐसे मुसलमान भाई बहन हैं जिनको यह नहीं पता होता है कि नमाज में क्या पढ़ा जाता है.

यहां तक कि उनको यह भी नहीं पता होता है कि रुको और सजदे में कौन सी तस्वीर पढ़ी जाती है इसलिए आज हम आप लोगों को यह सारी जानकारी देंगे और आप लोगों को बताएंगे किनमाज की दुआ हिंदी में और कब कौन सी चीज पढ़ी जाती हैं.
सना-
इन्नी वाज्जःतु वजहिया लिल्लज़ी फतरसामावाती वलअर्ज़ा हनी -फ़ो -व- वमा आना मिनल मुशरिकीन
उसके बाद ये पढें-
अल्लाहु अकबर
अल्लाह सबसे बड़ा है।
सुब्हान-कल्ला हुम्मा व बिहम्दिका व तबा-रा-कस्मुका व तआला जद्दु-का वलाइलाहा ग़ैरुक।
तर्जुमा
ऐ अल्लाह ! मैं तेरी पाकी बयान करता हूँ , और तेरी तअरीफ़ करता हूँ और तेरा नाम बरकत वाला है , और तू आला है , और नहीं है कोई । मअबूद सिवाय तेरे
1. अलहम्दो शरीफ | सूरह फातिहा
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम
अल्हम्दुलिल्लहि रब्बिल आलमीन
अर रहमा-निर-रहीम
मालिकि यौमिद्दीन
इय्याका न अबुदु व इय्याका नस्तईन
इहदिनस् सिरातल मुस्तक़ीम
सिरातल लज़ीना अन अमता अलय हिम
गैरिल मग़दूबी अलय हिम् वलज़्ज़ाल्लीन (आमीन)।रुको से उठे तो ये दुआ पढें
सुब्हाना रब्बीयल अज़ीम
मैं अपने अज़ीम रब की पाकी बयान करता हूँ।
खड़े हो तो ये दुआ पढें
समिअल्लाहु लिमन हमिदह
अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी तारीफ की
रब्बना लकल हम्द
ऐ हमारे रब, तमाम तारीफें तेरे ही वास्ते हैं
सुब्हा-ना रब्बियल आला
मैं अपने बुलंद रब की पाकी बयां करता हूँ।
अल्लाहुम्मग्फिरली वरहमनी वहदीनी वअ-फिनी वरज़ुक-नी वज़बुर-नी वर्फा-नी
2. अत्तहिय्यत

अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलैका अय्युहन-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व ब-रकातुहू
अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्ला हिस्सालिहीन अशहदु अल्ला इला-हा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।तमाम तहिय्यतें और नमाजे और पाकीजगियां अल्लाह के लिए है सलाम आप पर ऐ नबी और अल्लाह कि रहमत और बरकतें हम पर और अल्लाह के नेक बन्दों पर सलाम मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई मअबूद नहीं और गवाही देता हूं मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम उसके बन्दें और रसुल हैं।
3. दरूद शरीफ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव वअला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहि-म इन्न-क हमीदुम्मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारकता अला इब्राहिमा व अला आलि इब्राहि-म इन्नका हमीदुम्मजीद ।ए अल्लाह सलामती उतार हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम पर और हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम की आल पर। जैसे सलामती की तूने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर और हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की आल पर। बेशक तू ही तारीफ़ के लायक बड़ी बुजुर्गी वाला है। ए अल्लाह बरकत उतार हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम पर और हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम की आल पर जैसे बरकतें की तूने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर और हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की आल पर। बेशक तू ही तारीफ़ के लायक बड़ी बुजुर्गी वाला है।
4. दुआ मासुरा
अल्ला हुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी ज़ुलमन कसीरंव वला यग़्फिरुज़-जुनूब इल्ला अन-त फ़गफ़िरली मग़-फिरतम मिन इनदिका वर-हमनी इन्नका अन्तल गफ़ुरुर्रहीम।
मैंने खुद पर बहुत जुल्म किया है और तेरे अलावा कोई भी मेरे गुनाहों को माफ नहीं कर सकता। या अल्लाह मेरी यह ख्वाहिश है कि तू मुझे बक्श दे और मुझ पर रहम फरमा। तु सब पर रहम करने वाला बड़ा मेहरबान है और अपना रहम हम पर भी अदा कर “।
अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिनकस्सलामु तबारकता या जल-जलाली वल इकराम।
ए अल्लाह तू सलामती वाला है, और तेरी तरफ ही सलामती है, तू बा-बरकत है, ए बुजुर्गी और इज्जत वाले।
अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका वनसतग़ फिरूका व नु’अ मिनु बिका व न तवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल खैर व नश कुरुका वला नकफुरुका व नख्लऊ व नतरुकु मैंय्यफ-जुरूका अल्लाहुम्मा इय्याका नअबुदु व ल-क- नुसल्ली व नस्जुदु वआलैका नस्आ व नह-फिदु व नरजू रहमतका व नख्शा अज़ाबका इन्ना अज़ा-ब-क बिल क़ुफ़्फ़ारिल मुलहिक़
या अल्लाह , हम तुझ से मदद चाहते हैं और तूझसे माफी भी मांगते हैं, तुझ पर ईमान भी रखते हैं और तुझ पर भरोसा करते हैं और तेरी बहुत अच्छी तारीफ करते हैं और तेरा शुक्र अदा करते हैं ना शुक्री नहीं करते । उस शख्स को अलग करते हैं और छोड़ते हैं जो अल्लाह की नाफरमानी करें ।
ऐ अल्लाह , हम तेरी ही इबादत करते हैं और तेरे लिए ही नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं और तेरी तरफ दौड़ते और झपटते हैं और तेरी रहमत के उम्मीदवार हैं और तेरे आजाब़ से डरते हैं, बेशक तेरा आजाब़ काफिरों को पहुंचने वाला है ।
हर नमाज में पढ़ी जाने वाली आयतें | Har namaj Mein Padhi jane wali Aayete

1. अऊज़ुबिल्लाही मिनश सैतानिर्रजीम
बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीमसुरह – कुल हुवल लाहू अहद।
तर्जुमा – कह दीजिए कि वह अल्लाह और एक है।सुरह – अल्लाहुस समद।
तर्जुमा – कह दीजिए अल्लाह अबदी मुतअल्लिक और बेनियाज़ है।सुरह – लम यलिद वलम यूलद।
तर्जुमा – वह ना ही किसी का बाप है, और ना ही किसी का बेेटा।सुरह – वलम यकूल लहू कुफुवन अहद।
तर्जुमा – अल्लाह के बराबर कोई नहीं है।2. बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम बाला है।इन्ना आतैना कल कौसर
बेशक हमने आपको कौसर अता कियाफसल्ली लिरब्बिका वन हर
बस अपने रब के लिए नमाज अदा करो और कुर्बानी करोइन्ना शानियाका हुवल अब्तर
बेशक आपका दुश्मन बे नामो निशान होगा।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं दोस्तों आज का हमारा यह आर्टिकल आप लोगों को काफी पसंद आया होगा इसमें हमें आप लोगों को नमाज में पढ़ी जाने वाली दुआ ओं के बारे में बताएं हमें उम्मीद है आप लोगों को यह दुआएं समझ आ गई होंगी. अगर आप लोगों को कोई भी कंफ्यूजन हो तो आपने दोबारा से इन दोनों को पढ़ सकते हैं और हम अपने को सही करना चाहेंगे कि इन दोनों को जल्द से जल्द याद कर ले और नमाज पढ़ना कायम करें.
क्योंकि हर मुसलमान पर नमाज पढ़ना पढ़ना अल्लाह हम सबको जिंदगी में सही नमाज पढ़ने की तौफीक अता फरमाए और हमारी नमाज सो को अपनी बारगाह में कुबूल फरमाए आमीन।






