सूरह वाकिया कौन से पारे में है ? | Surah waqiah kaun se pare mein hai : अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू दोस्तों आज किस आर्टिकल में हमने आप लोगों को सूरह वाकिया के बारे में बताया है सूर्य वाक्य क्या होता है सूर्य वाक्य कौन से पारे में है और सूरह वाकिया हिंदी में हमने आप लोगों को तर्जुमे के साथ बताई है।
जिससे आप लोगों को याद करने में कोई भी मुश्किलात ना आए और अगर कोई शख्स याद करना चाहता है तो वह भी इसे आसानी से याद कर सकता है दोस्तों बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जिनको अरबी भी नहीं आती है और वह हमेशा यह सोचता करते हैं और सोचकर हमेशा पछताते हैं कि काश कि हमें भी अरबी आती होती है।
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तो हम भी यह सूर्य पढ़ते हम भी कुरान पढ़ते लेकिन हम आप लोगों से बताना चाहते हैं कि ऐसा कोई भी काम नामुमकिन नहीं है जो आप नहीं कर सकते हैं इसलिए बस सिर्फ और सिर्फ दिल में इसकी लगन होनी चाहिए और आप हर काम को कर सकते हैं अगर आपको अरबी नहीं आती है।
कोई बात नहीं आप हिंदी में इस सूरह वाकिया को पढ़ सकते हैं और इस सूरह वाकिया को अच्छी तरीके से याद कर सकते हैं. तर्जुमे को पढ़ने के बाद आपको यह सूरह वाकिया बहुत ही आसानी से समझ में आ जाएगी।
अगर आप लोग सूरह वाकिया के बारे में यह सारी मालूमात हासिल करना चाहते हैं तो आप लोग हमारे इस आर्टिकल को आखिर तक पढ़ ले इसमें आपको सूरह वाकिया से जुड़े तमाम सवालों के जवाब मिल जाएंगे तो आइए जानते हैं सूरह वाकिया कौन से पारे में है।
सूरह वाकिया कौन से पारे में है ? | Surah waqiah kaun se pare mein hai ?

दोस्तों कुरान की यह सूरह कुरान के अंदर है लेकिन अगर देखी जाए तो यह सारी सूरह अलग-अलग पारो में होती है उसी तरीके से सूरह वाकिया भी एक अलग बारे में है जिसके बारे में हम आप लोगों को बताएंगे और सूरह वाकिया में कितने आयते हैं यह किस नंबर पर सो रहे हैं इसके बारे में भी बताएंगे तो आइए जानते हैं।
सूरह वाकिया में 96 आयते होती हैं और यह कुरान शरीफ के 56 नंबर पर सूरह वाकिया पाई जाती है।
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है
इज़ा व – क़ – अ़तिल् – वाकि – अतु
जब क़यामत बरपा होगी और उसके वाक़िया होने में ज़रा झूट नहीं
लै – स लिवक्अ़तिहा काज़िबह् •
उस वक्त लोगों में फ़र्क ज़ाहिर होगा
खाफ़ि – ज़तुर – राफ़ि – अः
कि किसी को पस्त करेगी किसी को बुलन्द
इज़ा रुज्जतिल् – अर्जु रज्जंव्-
जब ज़मीन बड़े ज़ोरों में हिलने लगेगी
व बुस्सतिल् – जिबालु बस्सा
और पहाड़ (टकरा कर) बिल्कुल चूर चूर हो जाएँगे
फ़ – कानत् हबा – अम् मुम् – बस्संव –
फिर ज़र्रे बन कर उड़ने लगेंगे
व कुन्तुम् अज़्वाजन् सलासः
और तुम लोग तीन किस्म हो जाओगे
फ़ – अस्हाबुल् -मैमनति मा अस्हाबुल – मै – मनः
तो दाहिने हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (वाह) दाहिने हाथ वाले क्या (चैन में) हैं
व अस्हाबुल् – मश् – अ – मति मा अस्हाबुल – मश् – अमः
और बाएं हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (अफ़सोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
वस्साबिकू नस् – साबिकून
और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं (वाह क्या कहना) वह आगे ही बढ़ने वाले थे
उलाइ – कल् – मुकर्रबून
यही लोग (ख़ुदा के) मुक़र्रिब हैं
फी जन्नातिन् – नअ़ीम
आराम व आसाइश के बाग़ों में बहुत से
सुल्लतुम् – मिनल् – अव्वलीन
तो अगले लोगों में से होंगे
व क़लीलुम् मिनल – आख़िरीन
और कुछ थोडे से पिछले लोगों में से मोती
अ़ला सुरुरिम् – मौजूनतिम्-
और याक़ूत से जड़े हुए सोने के तारों से बने हुए
मुत्तकिई – न अ़लैहा मु – तकाबिलीन
तख्ते पर एक दूसरे के सामने तकिए लगाए (बैठे) होंगे
यतूफु अ़लैहिम् विल्दानुम् – मु – ख़ल्लदून
नौजवान लड़के जो (बेहिश्त में) हमेशा (लड़के ही बने) रहेंगे
बिअक्वाबिंव् – व अबारी – क़ व कअ्सिम् – मिम् – मअ़ीन
(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे
ला युसद् – दअू – न अ़न्हा व ला युन्ज़िफून
जिसके (पीने) से न तो उनको (ख़ुमार से) दर्दसर होगा और न वह बदहवास मदहोश होंगे
व फ़ाकि – हतिम् – मिम्मा य – तख़य्यरून
और जिस क़िस्म के मेवे पसन्द करें
व लह़्मि तैरिम् – मिम्मा यश्तहून
और जिस क़िस्म के परिन्दे का गोश्त उनका जी चाहे (सब मौजूद है)
व हुरुन् अी़न
और बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरें
क – अम्सालिल् – लुअलुइल् – मक्नून
जैसे एहतेयात से रखे हुए मोती
जज़ा – अम् बिमा कानू यअ्मलून
ये बदला है उनके (नेक) आमाल का
ला यस्मअू – न फ़ीहा लग्वंव् – व ला तअ्सीमा
वहाँ न तो बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह की बात
इल्ला की़लन् सलामन् सलामा
(फहश) बस उनका कलाम सलाम ही सलाम होगा
व अस्हाबुल् – यमीनि मा अस्हाबुल् – यमीन
और दाहिने हाथ वाले (वाह) दाहिने हाथ वालों का क्या कहना है
फी सिद्रिम् – मख़्जूदिंव् –
बे काँटे की बेरो और लदे गुथे हुए
व तल्हिम् – मनजूदिंव् –
केलों और लम्बी लम्बी छाँव
व ज़िल्लिम् मम्दूदिंव् –
और झरनो के पानी
व माइम् – मस्कूब
और अनारों
व फ़ाकि – हतिन् कसी – रतिल् –
मेवो में होंगें
ला मक्तू – अ़तिंव् – व ला मम्नू – अ़तिंव्
जो न कभी खत्म होंगे और न उनकी कोई रोक टोक
व फुरुशिम् – मरफूअः
और ऊँचे ऊँचे (नरम गद्दो के) फ़र्शों में (मज़े करते) होंगे
इन्ना अन्शअ्नाहुन् – न इन्शा – अन्
(उनको) वह हूरें मिलेंगी जिसको हमने नित नया पैदा किया है
फ़ – जअ़ल्नाहुन् – न अब्कारन्
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ प्यारी प्यारी हमजोलियाँ बनाया
अुरुबन् अत्राबल्-
ये सब सामान
लिअस्हाबिल् – यमीन
दाहिने हाथ (में नामए आमाल लेने) वालों के वास्ते है
सुल्लतुम् – मिनल् – अव्वलीन
(इनमें) बहुत से तो अगले लोगों में से
व सुल्लतुम् – मिनल् – आख़िरीन
और बहुत से पिछले लोगों में से
व अस्हाबुशु – शिमालि मा अस्हाबुश् – शिमाल
और बाएं हाथ (में नामए आमाल लेने) वाले (अफसोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
फ़ी समूमिंव् – व हमीमिंव् –
(दोज़ख़ की) लौ और खौलते हुए पानी
व ज़िल्लिम् – मिंय्यह्मूमिल् –
और काले सियाह धुएँ के साये में होंगे
ला बारिदिंव् – व ला करीम
जो न ठन्डा और न ख़ुश आइन्द
इन्नहुम् कानू क़ब् – ल ज़ालि – क मुत् – रफ़ीन
ये लोग इससे पहले (दुनिया में) ख़ूब ऐश उड़ा चुके थे
व कानू युसिर्रू – न अ़लल् – हिन्सिल् – अ़ज़ीम
और बड़े गुनाह (शिर्क) पर अड़े रहते थे
व कानू यकूलू – न अ – इज़ा मित्ना व कुन्ना तुराबंव् – व अ़िज़ामन् अ – इन्ना ल – मब्अूसून
और कहा करते थे कि भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी और हडिडयाँ (ही हडिडयाँ) रह जाएँगे
अ – व आबाउनल् – अव्वलून
तो क्या हमें या हमारे अगले बाप दादाओं को फिर उठना है
कुल् इन्नल् – अव्वली – न वल् – आख़िरीन
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगले और पिछले
ल – मज्मूअू – न इला मीकाति यौमिम् – मअ्लूम
सब के सब रोजे मुअय्यन की मियाद पर ज़रूर इकट्ठे किए जाएँगे
सुम् – म इन्नकुम अय्युहज़्जा़ल्लूनल् – मुकज़्ज़िबून
फिर तुमको बेशक ऐ गुमराहों झुठलाने वालों
ल – आकिलू – न मिन् श – जरिम् – मिन् ज़क़्कूम
यक़ीनन (जहन्नुम में) थोहड़ के दरख्तों में से खाना होगा
फ़मालिऊ – न मिन्हल् – बुतून
तो तुम लोगों को उसी से (अपना) पेट भरना होगा
फ़शारिबू – न अ़लैहि मिनल् – हमीम
फिर उसके ऊपर खौलता हुआ पानी पीना होगा
फ़शारिबू – न शुर्बल् – हीम
और पियोगे भी तो प्यासे ऊँट का सा (डग डगा के) पीना
हाज़ा नुजुलुहुम् यौमद्दीन
क़यामत के दिन यही उनकी मेहमानी होगी
नह्नु ख़लक़्नाकुम् फ़लौ ला तुसद्दिकून
तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है
अ – फ़ – रऐतुम् – मा तुम्नून
फिर तुम लोग (दोबार की) क्यों नहीं तस्दीक़ करते
अ – अन्तुम् तखलुकूनहू अम् नह्नुल – ख़ालिकून
तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं
नह्नु कद्दरना बैनकुमुल् – मौ – त व मा नह्नु बिमसबूक़ीन
हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं
अ़ला अन् – नुबद्दि – ल अम्सा – लकुम् व नुन्शि – अकुम् फ़ी मा ला तअ्लमून
कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते
व ल – क़द् अ़लिम्तुमुन् – नश्अ – तल् ऊला फ़लौ ला तज़क्करून
और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते
अ – फ़ – रऐतुम् – मा तहरुसून
भला देखो तो कि जो कुछ तुम लोग बोते हो क्या
अ – अन्तुम् तज् – रअूनहू अम् नह्नुज् – ज़ारिअून
तुम लोग उसे उगाते हो या हम उगाते हैं अगर हम चाहते
लौ नशा – उ ल – जअ़ल्नाहु हुतामन् फ़ज़ल्तुम् तफ़क्कहून
तो उसे चूर चूर कर देते तो तुम बातें ही बनाते रह जाते
इन्ना ल – मुग़रमून
कि (हाए) हम तो (मुफ्त) तावान में फॅसे (नहीं)
बल् नह्नु महरूमून
हम तो बदनसीब हैं
अ – फ – रऐतुमुल् मा अल्लज़ी तश्रबून
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं दोस्तों हमारे द्वारा बताए गए इस्लामिक इंफॉर्मेशन आप लोगों को काफी पसंद आई होगी इस आर्टिकल में हमने आप लोगों को बताया कि सूर्य वाक्य कौन से पारे में होती है और साथ ही साथ हमने आप लोगों को यह भी बताया कि सूरह वाकिया का तर्जुमा क्या होता है .
सूर्य वाक्य हिंदी में बताइए है और साथ ही साथ हमने आप लोगों को यह भी बताया है कि सूरह वाकिया में कितनी आयतें होती हैं और यह कुरान के कितने नंबर पर होती है तो अगर आप लोगों ने इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ा होगा तो आप लोगों को यह सारी जानकारी हासिल हो गई होगी,
अगर नहीं पढ़ा है तो आप लोग दोबारा से पढ़ सकते हैं और यह तालीम हासिल कर सकते हैं क्योंकि यह हर मुसलमान को जानने वाली बातें हैं.






